Friday, 29 January 2016

कहाँ क़ातिल बदलते हैं फ़क़त चेहरे बदलते हैं/हबीब जालिब

कहाँ क़ातिल बदलते हैं फ़क़त चेहरे बदलते हैं
अजब अपना सफ़र है फ़ासले भी साथ चलते हैं

बहुत कमजर्फ़ था जो महफ़िलों को कर गया वीराँ
न पूछो हाले चाराँ शाम को जब साए ढलते हैं

वो जिसकी रोशनी कच्चे घरों तक भी पहुँचती है
न वो सूरज निकलता है, न अपने दिन बदलते हैं                                              

कहाँ तक दोस्तों की बेदिली का हम करें मातम
चलो इस बार भी हम ही सरे मक़तल निकलते हैं

हमेशा औज पर देखा मुक़द्दर उन अदीबों का
जो इब्नुलवक़्त होते हैं हवा के साथ चलते हैं

हम अहले दर्द ने ये राज़ आखिर पा लिया ‘जालिब’
कि दीप ऊँचे मकानों में हमारे खूँ से जलते हैं
-- हबीब जालिब 



मक़तल=क़त्लगाह की तरफ़
इब्नुलवक़्त=मौक़ापरस्त

Wednesday, 27 January 2016

ये ठीक है कि तेरी गली में न आयें हम/हबीब जालिब

ये ठीक है कि तेरी गली में न आयें हम.
लेकिन ये क्या कि शहर तेरा छोड़ जाएँ हम.

मुद्दत हुई है कूए बुताँ की तरफ़ गए,
आवारगी से दिल को कहाँ तक बचाएँ हम.

शायद बकैदे-जीस्त ये साअत न आ सके
तुम दास्ताने-शौक़ सुनो और सुनाएँ हम.

उसके बगैर आज बहोत जी उदास है,
'जालिब' चलो कहीं से उसे ढूँढ लायें हम

----हबीब जालिब 

Tuesday, 26 January 2016

मेरा जन्मदिन .....

25 जनवरी सन् 1989 को हम इस दुनिया में सुबह 8 बजकर 15 मिनट पर पधारे, घर क्या खानदान में सबसे छोटा भाई हूँ सो अब तक इसी गफलत में रहता हूँ कि यार अभी तो बच्चा हूँ , लेकिन जिंदगी गफलत में रहे है ये भी तो अच्छा नही है परिवार और लँगोटिया यार तो साथ है ही लेकिन आप सब फ़ेसबुक के यार भी कम नही है जब से ब्लॉगर पे अड्डा बनाया है तब से कई यार मिले है वो हमउम्र भी है और कुछ उम्र से बड़े भी , लेकिन यारी मस्त है दोस्तों !! आपकी डांट , आपका प्यार हमेशा साथ रहे यही कामना है आप सबका तहेदिल से धन्यवाद जो इस जन्मदिन पर बधाई भेजी हैं आपका प्यार और सलीका सर आँखों पर !!!


आपका प्यारा निशान्त यादव

Friday, 15 January 2016

रोको मत , मुझे आने दो...



 रोको मत , मुझे आने दो
तुम अकेले नहीं हो इस सफ़र में
पीछे मुड के सुनना
मेरे कदमो की आहट भी होगी
तुम चलो रुको मत
मुझे भी तो आने दो
तुम जब थक जाओगे , निढाल हो जाओगे
तब मेरे कदम तुम्हारे साथ होंगे
कोई रहमो करम न सही
मुझे मेरा कर्म निभाने दो
तुम नदी से अविरल हो
मगर कभी सूखे तो
मुझे उसमे मिल जाने दो
रोको मत , मुझे आने दो
कुछ आएंगी सुनी राहें
घोर अँधेरी संकरी राहें
मुझको दीपक बन जाने दो
रोको मत , मुझे आने दो
मोड़ कई आएंगे ,तुमको शायद  भरमाएंगे
मुझको सूचक बन जाने दो
रोको मत , मुझे आने दो
       
        -----निशान्त यादव